
बगीचा । रोहित कुमार (वर्तमान भारत)
बगीचा ब्लॉक के टांगरडीह में शनिवार, 16 मई को जेठ माह की अमावस्या पर वट सावित्री व्रत मनाया गया। अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कामना के लिए सुहागिन महिलाओं ने विधि-विधान से वट वृक्ष (बरगद के पेड़) की पूजा-अर्चना की और निर्जला व्रत रखा।

सुबह से ही नवविवाहित और सुहागिन महिलाएं पारंपरिक परिधानों में पूजा की थाली लिए वट वृक्षों के पास जुटने लगीं। उन्होंने बरगद के पेड़ को कुमकुम का तिलक लगाया और फल, गुड़, भीगे चने तथा नारियल का प्रसाद अर्पित किया।

इसके बाद, सुखद वैवाहिक जीवन और पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने वृक्ष के चारों ओर सूत का कच्चा धागा (मौली बंधन) बांधते हुए परिक्रमा की। इस दौरान मंगल गीत गाए गए और वट सावित्री की कथा सुनी गई। टांगरडीह गांव के केई स्थानों पर भी सुबह से ही पूजा -अर्चना के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ी जहां बड़ी संख्या में महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा संपन्न की इस वर्ष वट सावित्री पर्व पर सुहागिनों के साथ-साथ कुंवारी कन्याओं और युवतियों में भी उत्साह देखा गया। कन्याओं ने पारंपरिक रूप से पुतलियों की पूजा-अर्चना कर अपने घर-परिवार के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जेठ अमावस्या के दिन ही सती सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लाए थे। तभी से वट वृक्ष की पूजा और यह व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है।
