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संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए माताओं-बहनों ने रखा ज्योतिया व्रत, करमा देव की आराधना और पारंपरिक गीत-नृत्य से सजी पर्व की शाम
बगीचा। बगीचा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत टांगरडीह में ज्योतिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत एवं करमा पूजा का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति, उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गांव में आस्था, ममता और समृद्ध लोकसंस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना को लेकर माताओं-बहनों ने पूरे श्रद्धाभाव से ज्योतिया व्रत रखा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
पर्व को लेकर गांव में सुबह से ही उत्साह और धार्मिक उमंग का माहौल बना रहा। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की खुशहाली और संतान के मंगलमय जीवन की कामना की। ज्योतिया व्रत मां और संतान के बीच अटूट प्रेम, त्याग, समर्पण और ममता का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर माताओं की श्रद्धा और भावनाओं ने पर्व की महत्ता को और भी विशेष बना दिया।

करमा देव की आराधना से गूंजा टांगरडीह, पारंपरिक गीत-नृत्य ने बांधा समां
वहीं करमा पूजा के अवसर पर ग्रामीणों ने करमा देव की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन में ग्रामीणों की भागीदारी देखने को मिली। करमा देव की आराधना के साथ पारंपरिक लोकगीतों और नृत्य ने उत्सव की रौनक बढ़ा दी। रात के समय दीपों की रोशनी और पूजा-पाठ के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया।
करमा पर्व ग्रामीण अंचल की समृद्ध लोकसंस्कृति, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामूहिक एकता का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, परंपराओं और पूर्वजों से मिली विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। टांगरडीह में करमा पूजा के दौरान पारंपरिक उत्साह और सामूहिक सहभागिता ने ग्रामीण संस्कृति की खूबसूरत तस्वीर प्रस्तुत की।
लोकपरंपराओं के संरक्षण के साथ सामाजिक एकता का संदेश
ज्योतिया व्रत और करमा पूजा का यह पावन अवसर केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने आपसी प्रेम, भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और एकजुटता का संदेश भी दिया। ऐसे पारंपरिक पर्व ग्रामीण समाज को एक सूत्र में बांधने के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ग्राम टांगरडीह में ज्योतिया जीवित्पुत्रिका व्रत एवं करमा पूजा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर माताओं-बहनों की ममता, करमा देव के प्रति अटूट आस्था और लोकसंस्कृति की मनमोहक छटा ने पर्व को यादगार बना दिया।
करमा देव की जय! ज्योतिया जीवित्पुत्रिका माता की जय!
हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा और हमारी पहचान ही हमारी असली धरोहर है।
